Tuesday, 26 November 2019

मूंगफली भिगोकर खाने वालों को बादाम से भी ज्‍यादा मिलती है ताकत!

*मूंगफली भिगोकर खाने वालों को बादाम से भी ज्‍यादा मिलती है ताकत*

ब्लड सर्कुलेशन ठीक रख कर हार्ट के साथ कई बीमारियों से बचाता है।इससे आप डायबिटीज जैसी बीमारी से बचे रहते है।रोजाना भीगी हुई मूंगफली का सेवन ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है।

आमतौर पर लोग सर्दियों में मूंगफली का सेवन ज्‍यादा करते हैं। लेकिन रोजाना भीगी मूंगफली के कुछ दाने खाने से आपकी कई स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याएं दूर हो सकती है। इसे भिगोकर खाने से इसमें मौजूद न्यूट्रिएंट्स और आयरन ब्लड सर्कुलेशन ठीक रख कर हार्ट के साथ कई बीमारियों से बचाता है। आइए जानते है रोजाना भीगी हुई मूंगफली खाने से सेहत को क्या फायदे होते है।

 *डायबिटीज*

रोजाना भीगी हुई मूंगफली का सेवन ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है। इससे आप डायबिटीज जैसी बीमारी से बचे रहते है। इसलिये यदि आपको भी शुगर की समस्या है तो रोज सुबह को पानी में रात भर भिगोये गये मूंगफली के दाने पचास ग्राम जरूर खायें । फाइबर से भरपूर मूंगफली को भिगो कर इसका सेवन करने से डाइजेशन सिस्टम ठीक रहता है। सर्दी में इसका सेवन शरीर को अंदर से गर्मी और एनर्जी देता है।

 *गैस और एसिडिटी*

पोटेशियम,मैग्नीज, कॉपर, केल्सियम,आयरन, सेलेनियम के गुणों से भरपूर मूंगफली को भिगो कर सुबह खाली पेट खाने से गैस और एसिडिटी की परेशानी दूर होती है। सर्दियों में भीगी हुई मूंगफली का गुड़ के साथ सेवन करने से जोड़ो और कमर दर्द की समस्या दूर हो जाती है। यह शरीर में कैल्शियम की पूर्ति करने का एक बहुत अच्छा साधन है।

 *आंखों की रोशनी*

बच्चों को सुबह भीगी मूंगफली के कुछ दाने खिलाने से इसमें मौजूद विटामिन आंखों की रोशनी और याद्दाश्त तेज करते है। मूंगफली को खाने से शरीर में खून की कमी भी पूरी हो जाती है। इसके अलावा इससे शारीरिक उर्जा और स्फूर्ती भी बनी रहती है। मूंगफली को इन्ही गुणों के कारण शायद गरीबों का बादाम कहा जाता है ।

 *कैंसर से सुरक्षा*

मूंगफली में मौजूद तैलीय अंश गीली खांसी और भूख न लगने की समस्या को दूर करते है। रोजाना इसके कम से कम 20 दाने खाना महिलाओं को कैंसर से दूर रखता है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, आयरन, नियासिन, फोलेट, कैल्शियम और जिंक शरीर को कैंसर सेल्स से लड़ने में मदद करते है।

 *सेहत का खजाना है मूंगफली*

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि 100 ग्राम कच्ची मूंगफली में 1 लीटर दूध के बराबर प्रोटीन होता है। मूंगफली में प्रोटीन की मात्रा 25 प्रतिशत से भी अधिक होती है। साथ ही मूंगफली पाचन शक्ति बढ़ाने में भी मदद करती है। 250 ग्राम भूनी मूंगफली में जितनी मात्रा में खनिज और विटामिन पाए जाते हैं, वो 250 ग्राम मांस से भी प्राप्त नहीं हो सकते। मूंगफली में न्यूहट्रियन्टीस, मिनरल, एंटी-ऑक्सीडेंट और विटामिन जैसे पदार्थ पाए जाते हैं। इसमें प्रोटीन, चिकनाई और शर्करा पाई जाती है। एक अंडे के मूल्य के बराबर मूंगफलियों में जितनी प्रोटीन व ऊष्मा होती है, उतनी दूध व अंडे से संयुक्त रूप में भी नहीं होती।

मूंगफली के खाने से दूध, बादाम और घी की पूर्ति हो जाती है। एक सर्वे के मुताबिक जिन लोगों के रक्त में ट्राइग्लाइसेराइड का लेवल अधिक होता है, वे अगर मूंगफली खाएं, तो उनके ब्लड के लिपिड लेवल में ट्राइग्लाइसेराइड का लेवल 10 फीसदी कम हो जाता है। अगर आप सर्दी के मौसम में मूंगफली खाएंगे तो आपका शरीर गर्म रहेगा। यह खाँसी में उपयोगी है व फेफड़े को बल देती है। एक बात ध्यान रखने की है कि मूंगफली पाचन शक्ति को बढ़ाती है, रुचिकर होती है, लेकिन गरम प्रकृति के व्यक्तियों को हानिकारक भी है।

Friday, 11 November 2016

नमस्कार मित्रो,
आज हम लेकर आया है!
मधुमेह (डायबिटिज)क्या है उसके लक्ष्ण और उपाएँ What is diabetes  & treatment in Ayurveda

मधुमेह (डायबिटिज) एक गंभीर बीमारी है आज के युग में ये बीमारी बहुत तेजी से बढ़ रही है! विशेष रूप से भारत में! मधुमेह (डायबिटिज) को धीमी मौत भी कहते है.

मधुमेह (डायबिटिज) के लक्ष्ण क्या होते है !

  • शरीर में गुलूकोस की मात्रा बढ़ जाती  है 
  • बार बार पिशाब आना। 
  • प्यास  ज्यादा  लगना।
  • भूख  ज्यादा  लगना।
  • त्वचा का सूखना।
  • घाव नहीं भरना।
  • त्वचा का बार बार इन्फेक्शन होना
ये सब मधुमेह (डायबिटिज) के लक्ष्ण है। 


 मधुमेह (डायबिटिज) के कारण !


  • मोटापा। 
  • अत्याधिक भोजन करना। 
  • खराब जीवन शैली।
  • दूध  आदि में  चीनी का ज्यादा सेवन।
  • शरीर का व्ययाम नही करना। 
  • कोल्ड ड्रिंक्स एवं अन्य सॉफ्ट ड्रिंक्स अधिक पीना।
  • धूम्रपान करना। 
  • आनुवंशिकता भी एक कारण है।

मधुमेह (डायबिटिज)क्या है उपाएँ।


1. ख़ान पान  में  सुधार  करें-चीनी (sugar) एवं  अन्य मीठे पदार्थो का सेवन कम से कम करें या ना करें, चोकर युक्त  आटा, हरी सब्जियां ज्यादा खाएं, मीठे फलों को छोड़ कर अन्य फल  खाएं, एक बार में ज्यादा खाने की बजाय भोजन  को छोटे छोटे अंतराल  में लें, घी तेल से बनी एवं तली भुनी चीजें जैसे- समोसे, कचौड़ी, पूड़ी, परांठे आदि का सेवन कम  से कम करें, गेहूँ, जौ एवं चने को मिला कर बनाई हुई यानि मिस्सी रोटी शुगर की बीमारी  में बहुत फायदेमंद होती  है।

2.शारीरिक रूप से सक्रिय रहे
नित्य व्यायाम करना, योग प्राणायाम का नियमित  अभ्यास करना, सुबह शाम चहल कदमी (Morning Evening walk) करना मधुमेह रोग में शुगर कंट्रोल करने के लिए बहुत लाभदायक  है तथा मोटापा नियंत्रण  में  रहता है जो  की  डायबिटीज  का  महत्वपूर्ण  कारण  है।

3. तनाव (Tension, Anxiety Stress) से  बचें
मधुमेह रोग में तनाव की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण होती है तनाव से बचने की पूरी  कोशिश करें। स्ट्रेस  या  तनाव  के  कारणों को आपसी बात चीत से हल करें, योगा, प्राणायाम, ध्यान  तथा सुबह शाम घूमने से स्ट्रेस कंट्रोल करने में सहायता मिलती  है।

4. घरेलु  उपाय ( Home Remedies for Diabetes in Hindi )
आयुर्वेद की कुछ जड़ी बूटियां मधुमेह रोग में  बहुत उपयोगी हैं इनका सेवन डायबिटीज में बहुत लम्बे  समय से किया  जा रहा है आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भी डायबिटीज में इनकी उपयोगिता सिद्ध कर चुका है।
  • दाना मेथी
दाना मेथी मधुमेह  में  बहुत उपयोगी है इसके लिए एक या दो चम्मच दाना मेथी को एक गिलास पानी में रात में  भिगो देते है सुबह मेथी को चबा चबा कर खा लेते हैं तथा मेथी के पानी को पी लेते हैं या मेथी का चूर्ण या सब्जी  बनाकर भी सेवन कर सकते हैं।
  • करेला –
करेला भी डायबिटीज के लिए अति महत्पूर्ण है इसके लिए करेले का जूस अकेले या आंवले के जूस में मिला कर 100-1125 ML  की मात्रा में सुबह शाम भूखे पेट लें साथ ही करेले की सब्जी  बनाकर या चूर्ण के रूप  में  भी सेवन  कर सकते  हैं।
  • जामुन –
जामुन का फल खाने  में जितना स्वादिस्ट और रुचिकारक होता है उतना  ही शुगर की तकलीफ में लाभदायक  होता  है इसके लिए जामुन के सीजन में जामुन के फल खाए जा सकते हैं तथा सीजन ना होने पर जामुन की गुठली का चूर्ण सुबह शाम भूखे  पेट पानी से ले सकते हैं।

कुछ घरेलु उपचार :-
  • मूली मधुमेह के लिए एक बहुत ही अच्छी औषधि है.
  • दिन में 2 बार मूली खाने से मधुमेह का रोग ठीक हो जाता है.
  • दानामेथी मधुमेह के लिये बहुत ही उपयोगी औषधि है.
व्यायाम तथा योगासन: किसी भी प्रकार का शारीरिक व्यायाम अथवा योगासन इस रोग के उपचार में सहायक हैं. मंडूकासन, पस्चिमोत्तनसन, विपरीतकरणी, हलासन तथा अन्य आसन एवम नाड़ी शोधन प्राणायाम जब नित्य रूप से किए जायें तो मधुमेह के उपचार में बहुत सहायता देते हैं.

सावधानी: योगासनों को किसी समझदार योगचर्य से सीखकर अथवा उनके दिशानिर्देश में ही करें. किताब या अन्य सोशियल मीडीया से देखकर योगासन का अभ्यास ना करें.

Sunday, 6 November 2016

आयुर्वेद (आयु + वेद = आयुर्वेद) विश्व की प्राचीनतम चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। यह अथर्ववेद का उपवेद है। यह विज्ञानकला और दर्शन का मिश्रण है। ‘आयुर्वेद’ नाम का अर्थ है, ‘जीवन का ज्ञान’ और यही संक्षेप में आयुर्वेद का सार है।

आयुर्वेद का परिभाषा एवं व्याख्या
आयुर्वेद विश्व में विद्यमान वह साहित्य है, जिसके अध्ययन पश्चात हम अपने ही जीवन शैली का विश्लेषण कर सकते है।
  • (1) आयुर्वेदयति बोधयति इति आयुर्वेदः।
अर्थात जो शास्त्र (विज्ञान) आयु (जीवन) का ज्ञान कराता है उसे आयुर्वेद कहते हैं।
  • (2) स्वस्थ व्यक्ति एवं आतुर (रोगी) के लिए उत्तम मार्ग बताने वाला विज्ञान को आयुर्वेद कहते हैं।
  • (3) अर्थात जिस शास्त्र में आयु शाखा (उम्र का विभाजन), आयु विद्या, आयुसूत्र, आयु ज्ञान, आयु लक्षण (प्राण होने के चिन्ह), आयु तंत्र (शारीरिक रचना शारीरिक क्रियाएं) - इन सम्पूर्ण विषयों की जानकारी मिलती है वह आयुर्वेद है।
इस शास्त्र के आदि आचार्य अश्विनीकुमार माने जाते हैं जिन्होने दक्ष प्रजापति के धड़ में बकरे का सिर जोड़ा था। अश्विनी कुमारों से इंद्र ने यह विद्या प्राप्त की। इंद्र ने धन्वंतरि को सिखाया। काशी के राजा दिवोदास धन्वंतरि के अवतार कहे गए हैं। उनसे जाकर सुश्रुत ने आयुर्वेद पढ़ा। अत्रि और भारद्वाज भी इस शास्त्र के प्रवर्तक माने जाते हैं। आय़ुर्वेद के आचार्य ये हैं— अश्विनीकुमार, धन्वंतरि, दिवोदास (काशिराज), नकुल, सहदेव, अर्कि, च्यवन, जनक, बुध, जावाल, जाजलि, पैल, करथ, अगस्त, अत्रि तथा उनके छः शिष्य (अग्निवेश, भेड़, जातूकर्ण, पराशर, सीरपाणि हारीत), सुश्रुत और चरक।

पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार संचार की प्राचीनतम् पुस्तक ऋग्वेद है। विभिन्न विद्वानों ने इसका रचना काल ईसा के ३,००० से ५०,००० वर्ष पूर्व तक का माना है। इस संहिता में भी आयुर्वेद के अतिमहत्त्व के सिद्धान्त यत्र-तत्र विकीर्ण है। चरकसुश्रुत, काश्यप आदि मान्य ग्रन्थ आयुर्वेद को अथर्ववेद का उपवेद मानते हैं। इससे आयुर्वेद की प्राचीनता सिद्ध होती है। अतः हम कह सकते हैं कि आयुर्वेद की रचनाकाल ईसा पूर्व ३,००० से ५०,००० वर्ष पहले यानि सृष्टि की उत्पत्ति के आस-पास या साथ का ही है।
उद्देश्य
आयुर्वेद का उद्देश्य ही स्वस्थ प्राणी के स्वास्थ्य की रक्षा तथा रोगी की रोग से रक्षा है। (प्रयोजनं चास्य स्वस्थस्य स्वास्थ्यरक्षणं आतुरस्यविकारप्रशमनं च)। आयुर्वेद के दो उद्देश्य हैं :
  1. स्वस्थ व्यक्तियों के स्वास्थ्य की रक्षा करना
  2. रोगी व्यक्तियों के विकारों को दूर कर उन्हें स्वस्थ बनाना

आयुर्वैदिक चिकित्सा के लाभ

  • आयुर्वेदीय चिकित्सा विधि सर्वांगीण है। आयुर्वेदिक चिकित्सा के उपरान्त व्यक्ति की शारीरिक तथा मानसिक दोनों में सुधार होता है।
  • आयुर्वेदिक औषधियों के अधिकांश घटक जड़ी-बुटियों, पौधों, फूलों एवं फलों आदि से प्राप्त की जातीं हैं। अतः यह चिकित्सा प्रकृति के निकट है।
  • व्यावहारिक रूप से आयुर्वेदिक औषधियों के कोई दुष्प्रभाव (साइड-इफेक्ट) देखने को नहीं मिलते।
  • अनेकों जीर्ण रोगों के लिए आयुर्वेद विशेष रूप से प्रभावी है।
  • आयुर्वेद न केवल रोगों की चिकित्सा करता है बल्कि रोगों को रोकता भी है।
  • आयुर्वेद भोजन तथा जीवनशैली में सरल परिवर्तनों के द्वारा रोगों को दूर रखने के उपाय सुझाता है।
  • आयुर्वेदिक औषधियाँ स्वस्थ लोगों के लिए भी उपयोगी हैं।
  • आयुर्वेदिक चिकित्सा अपेक्षाकृत सस्ती है क्योंकि आयुर्वेद चिकित्सा में सरलता से उपलब्ध जड़ी-बूटियाँ एवं मसाले काम में लाये जाते हैं।
धन्यवाद आप सबका !